बज्जिकाञ्चल संवाददाता,रौतहट,१६ गते चैत ।

विश्व–सञ्जय बज्जिका पाण्डुलिपि पुरस्कार २०२६ महोत्तरीके साहित्यकार अजयकुमार झाके कृतिके प्रदान करेके निर्णय सार्वजनिक कएलगेल हए । बज्जिका साहित्य संगम रौतहटके व्यवस्थापनमे विश्व–सञ्जय बज्जिका साहित्य कोषद्वारा स्थापित पुरस्कारके पहिल संस्करण चर्चित साहित्यकार झाके पुस्तक ‘दृष्टिकोण’के देबेके निर्णय सार्वजनिक भेल हए । बज्जिका साहित्य संगम रौतहटके अध्यक्ष किशुनदयाल श्रीकृष्णके हस्ताक्षरसे साहित्यकार झाके पुरस्कार देबेके निर्णय सार्वजनिक भेल हए ।

कोषके ओरसे विश्वराज अधिकारीके संयोजकत्वमे रहल निर्णायक समितिमे बज्जिका साहित्य समाज सर्लाहीके अध्यक्ष रामचन्द्र महतो कुशवाहा आ बज्जिका साहित्य संगम रौतहटके अध्यक्ष किशुनदयाल श्रीकृष्ण सदस्य रहलन । संगमद्वारा पहिलबेर पुसमे अप्रकाशित मगर तयार कृति पुरस्कारके लेल आह्वान कएलगेल रहे । पुरस्कारके रकम पन्द्रह हजार नेपाली रुपैया राखलगेल रहे मगर बादमे कोषद्वारा कृति प्रकाशित करेके निर्णय कएलगेल रहे । रौतहट, सर्लाही आ महोत्तरीसे पुरस्कारके लेल कृतिके पाण्डुलिपि प्राप्त भेल रहे । प्राप्त पाण्डुलिपिके अध्ययन कके ‘दृष्टिकोण’ पुस्तकके पुरस्कृत करइत प्रकाशन करेके निर्णय कएलगेल हए ।

पुरस्कारके लेल रौतहटसे रेणु गुप्ता आ बिगन साह रौनियार तथा सर्लाहीसे चन्द्रशेखर प्रसाद रस्तोगीके लघुकथा आ कविता विधाके पाण्डुलिपि प्राप्त भेल जानकारी देलगेल हए । पुरस्कारमे सहभागी होखेवाला सभीके संस्थाके ओरसे आधार आभार प्रकट कएलगेल हए ।

सर्लाहीके सिमरा निवासी नेपाल प्रहरीसेवासे निवृत्त समाजसेवी महानन्द झाद्वारा स्थापना कएलगेल विश्व–सञ्जय बज्जिका साहित्य कोषमे करिब अढाई लाख रुपैया जम्मा होगेल हए । कोषमे रहल रकमसे ही पुरस्कार देबेके निर्णय कएलगेल हए । नेपालमे बज्जिका साहित्यके विकासके लेल पहिलबेर पाण्डुलिपि कृतिके ही पुरस्कृत करेके सुरुआत कएलगेल हए । आगामी दिनमे अक्षय कोषमे रकम थपइत जाएके संस्थापक झाके कहनाम हए ।

महोत्तरी सदरमुकाम जलेश्वरमे अवस्थित रामानन्द विश्वेश्वर महेन्द्र क्याम्पसके क्याम्पस प्रमुखसमेत रहल साहित्यकार झाके एसे पहिले बज्जिकामे ‘प्रेमराग’ नामके कविता संग्रह प्रकाशित हए । बज्जिका, हिन्दी आ नेपालीमे निरन्तर सक्रिय साहित्यकार झा नेपाल आ भारतके अनेकों प्रतिष्ठित साहित्यिक तथा सांस्कृतिक संस्थाद्वारा सम्मानित छथिन । हुनका विद्यावाचस्पति अलंकारसे भी अलंकृत कएल जाचुकल हए ।