चिलगडी—लघुकथा—विश्वराज अधिकारी

बज्जिकाञ्चल,१७ गते माघ । लडकारीमे जब रामदयाल आकासपर चिलगडी देखे त देखते रह जाए। सोंचे( कौनो दिन हमहुँ एहिना चिलगडीमे चढम। अकासमे घुमम। गैबारीमे ओलार से जंगल ओरि निकलल रामदयाल…

कुल देवतासबके पूजा-विवेक शर्मा 

बज्जिकाञ्चल,०६ गते भादाे ।  बितल साओन महिनामे कुल देवतासबके पूजा आराधना करेके परम्परा नेपाली समाजमे खास रुपसे रहल हए । साउनी पुजा मनाबेके बहुत सारा कारण सब हए: जेना की …

संस्कृतिमे बढ़इत जारहल विकृति—शिवशंकर झा

बज्जिकाञ्चल,०६ गते भादो । पूर्वीय दर्शन, संस्कृति सभ्यता एकदम ही प्राचीन, वैज्ञानिक, मानव हितकर आ हरेक दृष्टिकोणसे उत्तम हए । आधुनिक विकासके युगमे अभी शिक्षाके विकास त बहुत जोडतोड होइहल…