फाका—उपवास —कविताःसुरेश वर्मा

फाका—उपवास आज व्यथित विकल बेचैन आकाश काहे हय साथ मे चांद भी चुप गुमसुम उदास काहे हय फूल कली भंवरा सब मस्ती में झूम रहल है ई फागुन के हवा…

देश प्रेम —कविताःराजेश कुशवाहा

देश प्रेम हमर देश के माटी, सोना जइसन चमकइत हए, नदिया, पहाड़ आ खेत, सबके आन—बान हए। देश के खातिर जवान, जान लड़ल हए, माता—पिता, बाप—दाई, गर्व से सिर उठावहए।…

गुरु—कविताःसिद्धान्त चौधरी

गुरु गुरु राष्ट्रके आनंद होईअ देवत्व, रामतकके यात्रा होईअ ! गुरु सृजनके खेलाडी होईअ क्षमता प्रदान करेबाला योद्धा होइअ ! गुरु शिष्यमे विचार जाग्रीत करइअ सफल होएबाला सार सूत्र सिखबइअ…

बज्जिका—कविताःराजन गुप्ता

बज्जिका  मिल—जुल के हसी—गाना, सुतल सपना जगावे, हमर बज्जिका भाषा, सबके दिल में बसावे। हमर माटी के सुगंध हए, हमर बोलि के रंग हए, बज्जिका में बात करू, दिलवा में…