डा.व्रजनन्दन वर्मा, रौतहट,१५ गते मंसिर ।
बज्जिकांचल क्षेत्रमे विभिन्न लोकदेवीदेवताके पूजा करेके चलन हए । लोकजीवनमे विभिन्न देवीदेवताके पूजा करेके चलन परम्परासे भी पुरान हए इहाँ बज्जिकांचल क्षेत्रमे पूजा होएबाला लोकदेवीदेवताके बारेमे अत्यन्त संक्षेपमे जानकारी प्रस्तुत कएलगेल हए ः ब्रह्मबाबा, सम्पूर्ण बज्जिकांचलमे लोकोपासनामे ब्रह्म (बर्हम)बाबाके नाम बहुत आदरके साथ लेलजाइअ । हिन सर्वव्यापी, सर्वोपरि आ सर्वशक्तिमान मानलजाइछत । हुनकर स्थान प्रायः सभी गाँओमे स्थापित हए । जहाँ हुनकर स्थान रहइअ उहाँ पिपरके गाछ जरुर रहइअ । जनपदीय मान्यताके अनुसार हरेक व्यक्ति कौनो भी मंगलकार्य जैसे – सादी, यज्ञोपवित, मुण्डन आदिके अवसरपर जाके हुनकर गहबरमे पूजाअर्चना करइअ ताकि हुनकर मांगलिक कार्य सम्पन्न होसके । सोखा, बज्जिकांचलमे सोखाके पूजा बडी धुमधामसे कएलजाइअ । सोखा देवताप्रति लोगके धारणा हए कि हिनकामे सृष्टिपालन, विनाश आ संहार सभी कार्य समाहित हए । हिनका खुसी करनाइ बहुत कठिन हए लेकिन तइओ लोग हरिअर दुभी, ओढउलके फूल, अगरबत्ती धूप, पान, कसइली, लङ, इलाइची, पियर वस्त्र, भोगमे खोवा, मकईके लावा आदि चढाके हिनका खुसी करेके प्रयास करइछत । हिन कूलदेवताके रुपमे पूजल जाइछत । हिनका सम्बन्धमे कहावत बहुत प्रचलित हए कि जे पुजे सोखा ओकरा घरे कहिओ नहोखे धोखा अर्थात जौन व्यक्ति सोखाके पूजा करइअ हुनकर हानि कभी नहोसकइअ । मंगलबाबा, बज्जिकांचलके कुछ जनपदीय क्षेत्रमे मंगलकारी अथवा कल्याणकारी देवताके रुपमे हिनकर पूजाअर्चना कएलजाइअ । हिन लाल लङौटाधारी देवता छत । हिन पैरमे खडाओ पेन्हइछत । हिन हाथमे हरदम त्रिशूल धारण कएले रहइछत । लोग हिनका बहुत श्रद्धाके साथ पूजा करइअ । हिन जनकल्याणकारी आ सुख शान्ति प्रदान करेबाला देवतामेसे एक छत । हिनका सभी जात–धर्मके लोग पूजा करइअ । हिनकर गहबर भी पिपरके गाछके निचा रहलई । लोग हिनका बतासा, लडू, गाँजाके चिलम आ लाल अबिर चढाके हिनकर पूजा करइअ । जोगीबाबा, अन्य देवीदेवताके जइसन ही जोगीबाबा भी लोगके धनसम्पत्ति, कंचनकाया आ निसन्तानके सन्तान, अन्धाके आँख आदि प्रदान करइछत । हिनकर पूजा बज्जिकांचलमे पिपरके निचा पिन्ड बनाके कएलजाइअ । हिनका भी लोग गाँजाके चिलम, बिस्टी, हुमाद, सतन्जाके साथ माटीके घोडा आ उँटके मूर्ति चढौनाके रुपमे चढाबइअ । हिनकर गणना भी जनकल्याणकारी देवताके रुपमे कएलजाइअ । डिहबारिन देवी, भारत बिहारके मुजफ्फरपुरसे करिब पचास किलोमिटर दूर महुआ रोडमे रहल विलनपुर गाँओमे डिहबारिन देवीके स्थान हए । उहाँ डिहपर एगो विशाल वटवृक्ष हए । उहे हिनकर स्थान स्थित हए । कहलजाइअ कि इहाँ आधा रातके बाद मृदंगके आवाज सुनाइ परले । कुमारी कन्या प्रत्येक मंगलवारके पूजा करइअ, एसे मंगलदोष मेटाजाले । भुइँया बाबा, हिन जातिविशेष (यादव)के लोकदेवता छत । हिनकर पूजा ऊ लोग भी करइछत जे गाई, भैँसी, बकरी आदि जानवर पोसले । पूजामे हिनका दूधके धार देवले । बसानन बाबा, लोकदेवीेदेवता जनपदीय इतिहासमे बसानन बाबाके नाम बहुत आदरके साथ लेल जाइअ । हिनकर जन्म बसौली (वैशाली)मे भेल रहे । आज भी इहाँ वसन्त पञ्चमी, विजयादशमी तथा प्रत्येक सोमवार आ शुक्रवारके दुभीखीर आदि चढाएलजाले । लोग हुमाद करइअ । उहाँ हुनका साथ बखतौर आ गलि बाबाके मूर्ति भी प्रतिष्ठापित हए । बखतौर बाबा, बज्जिकांचलके देवीदेवतामे बखतौर बाबाके नाम आदर आ श्रद्धाके साथ लेलजाइअ । हिनकर जन्म ससलपुर (सहरसा)मे भेल रहे । हिनकर पूजा भी पशु पालेबाला लोग ही विशेषरुपसे करइअ । कारुबाबा, हिनकर पूजा भी पशुपालक किसान लोग ही करइछत । कहलजाइअ कि गाईके खुसी कारुबाबाके खुसी आ गाईके दुख कारुबाबाके दुख सझलजाइअ । कुछ लोग हिनका कारु खिरहरके नाओसे भी पूजा करइअ । बिशोराउत बाबा, बसावन, बखतौर आ कारुबाबाके जइसन बिशोराउत बाबाके पूजा भी विशेष रुपसे उहे लोग ही करइछत जे पशुपालनके काम करइछत । लोग अपना गाई भैँसीके दुधारु बनाके राखेला शिनकर पूजा करइतछत । अइसन मान्यता हए कि जे हिनकर पूजा करइछत हुनकर पशुधन निरोग आ दुधारी रहले । रघुनाथ भुँइयाबाबा, हिनकर पूजा भी उहे लोग करइछत जे लोग गाई भैँसी आ बकरी पालनकरइछत । रुन्नी भुँइयाबाबा, हिनकर पूजा भी बज्जिकांचलके यदुवंशी लोग ही बहुत धुमधामसे करइअ । उहे लोग पूजा करइछत जे पशुपालनके काम करइछत । गरीब भुँइयाबाबा, बज्जिकांचलमे हिनकर पूजा धोबी जातके लोग करले । ई लोग हिनका खैनी, तम्बाकु, गाँजा आ दूधके धार देके फूल, पान, कसइली आदि नैवेद्य चढाके हिनकर पूजा करइछत । सहलेस बाबा, हिनकर पूजा बज्जिकांचलमे कएलजाइअ । लोग हिनका माटीके घोडा, पान, फूल, गाँजा आ दारु आदि चढाके हिनकर पूजा करइछत । राहबाबा, राहबाबाके पूजाके पूजा दुसाध जातके लोग करइछत । कहलजाइअ कि राहबाबा ब्राह्मण जातके रहे लेकिन हिन अपन विवाह दुसाध जातके लडकी पुन्नरिसे कएले रहलन, जेकरा कारण हिनकर पूजा दुसाध जातके बीचमे होएलागल । हिनकर पूजा भगतलोग करबाबले । भगत खौलइत खीरके अपना हाथले लारइछत आ नांगा तरबारपर खडा होके हिनकर पूजा करइछत । राहबाबाके हाथमे पोथी हमेशा शोभायमान रहइअ । कारिखबाबा, कारिख बाबा भी यादवलोगके देवता मानलजाइछत । बज्जिकांचलके सम्पूर्ण भूभागमे हिनकर पूजा होखले । कुछलोगके घरमे हिन कूलदेवताके रुपमे पुजलजाइछत । लोग हिनकर आराधना श्रद्धाभक्तिके साथ करइछत । ज्योतिबाबा, हिन भी दुसाध जातके देवता छत । हिनकर पूजा भी विशेष कके बहुत धुमधामके साथ कएलजाइअ । अमरसिंह बाबा, हिन बज्ज्किांचलके एगो विशेष जात मल्लाहे जनपदीय देवता छत । हिनकर पूजा बहुत उत्साहके साथ कएलजाइअ । केवलसिंह बाबा, हिन भी मल्लाहके देवता मानलजाइछत । हिनकर पूजा राम नवमीके दिन सामूहिक रुपसे कएलजाइअ । जयसिंह बाबा, हिन भी मल्लाहके देवता मानलजाइछत । हिनकर गहवरमे पान, फूल, बतासा, धूप, दीप आदि चढाकर पूजा कएलजाइअ । गणिनाथ बाबा, हिनकर पूजा बज्जिकांचलके कानू जातके लोग बडा ही तामझामके साथ करइछत । हिन एक नाथपन्थी सिद्ध पुरुष रहलन । गोविन्दबाबा, हिनकर पूजा मधेसिया वैश्यलोग करइछत, उनकर हिन लोकदेवता छत । हिनकर एक मन्दिर मुजफ्फरपुर नगरके बीबीगंज मोहल्लामे स्थापित हए । उहाँ पहुँचके लोग हिनकर पूजा करइअ । फेकूराम बाबा, हिनकर पूजा हलुआई आ कानू जातके लोग बहुत आदर आ श्रद्धाभावके साथ करइछत । लोगके बीच अइसन धारणा हए कि फेकूराम बाबा सात सय बाघसे लडइत मारलगेल रहलन । हिनकर ई वीरगाथा बहुत मसहुर हए । मरलाके बाद हिनका चितामे आग नलगाबलगेल रहे बल्कि स्वयम ही जरगेल रहे । मनसाराम बाबा, हिनकर पूजा तेली जातके लोग करइछत । हिनकर जन्म बैदाग्राम सीतामढीमे भेल रहे । श्री मुनीश्वरनाथ मुनीशके अनुसार मनसारामके पूजा करेबालाके मनोरथ हमेशा पूर्ण होअले । भालु आ मनसारामके लडाइके गाथा सर्वविदित हए । हिनकर पूजा लोकदेवताके रुपमे कएलजाइअ । हिनका प्रति लोगमे बहुत आस्था आ विश्वास हए । दीनभदरी बाबा, हिन मुसहर जातके लोकदेवता छथिन । बज्जिकांचलके मुसहर जातके लोग हिनकर पूजा करइछत । हिनका साथे मुसहर लोग मसान, डाक आदि देवीदेवताके भी पूजा करइछत ।

