काठमाडौं, असोज ३ .

संविधान दिवसके अवसरमे लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी, नेपाल (लोसपा) आई आसिन ३ गतेके ‘कालो दिन’ तथा ‘शोक दिवस’के रूपमे मनएले हए । पार्टीके केन्द्रीय कार्यालय बबरमहल, काठमाडौंमे आयोजित कार्यक्रममे अध्यक्ष महन्थ ठाकुर, वरिष्ठ सह–अध्यक्ष सर्वेन्द्रनाथ शुक्लालगायतके नेतासब संविधानप्रति गम्भीर असन्तुष्टि जनाबइत आपन धारणा राखले रहलन ।

पार्टी अध्यक्ष महन्थ ठाकुर कार्यक्रममे सम्बोधन करइत कहलन, ूअसिन ३ के संविधान सब जाति, वर्ग, समुदायके न्याय आ समावेशी अधिकार देबे नसल । इ संविधान हमनीके सपना आ आन्दोलनके अपमान हए ।ू हुन संविधान निर्माणके प्रक्रियामेहि मधेस आ थरूहट आन्दोलनके आवाजसब उपेक्षा भेल उल्लेख करइत, जेनजी आन्दोलनमे सहादत भेल वीर युवासबके समझनामे इ दिनके ‘शोक’ आ मधेसी विरोधी संविधानके विरूद्वमे ‘कालो दिन’के रूपमे मनाबनाई बाध्यता भेल बतएलन ।

वरिष्ठ सह–अध्यक्ष सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला भि संविधान मधेस, जनजाति, मुस्लिम, थारू लगायतके पहिचान आ अधिकार सुनिश्चित करे नसकल आरोप लगएलन । हुन कहलन, ूहमनी लडले रहि समान अधिकारके लेल, लेकिन संविधान त आउरी विभाजन बढएले हए । येहिसे आइके दिन हमनीके लेल खुसी नहए, पीडाके दिन हए ।ू कार्यक्रममे उपस्थित अन्य नेतासब भि संविधान संशोधनके आवश्यकता तत्काल रहलामे जोड देइत आन्दोलनके विकल्प नरहल धारणा राखले रहे ।

कार्यक्रममे करिया झण्डा देखाके विरोध प्रकट गरिएको कएले रहे आ सहभागीसब करिया पट्टी बानके संविधानप्रति असन्तुष्टि जनएले रहे । कार्यक्रममे संविधान दिवसके ‘शोक दिवस’के रूपमे मनाबनाई राजनीतिक सन्देश मात्र नहोके मधेस केन्द्रित आन्दोलनके निरन्तरताके संकेतसमेत कएलगेल नेतासब जनएले हए ।