रौतहट, २० भदौं ।

“जुन जोगी आए कानै चिरेको” कहेबाला नेपाली उखान जइसन रौतहटके डिभिजन वन कार्यालयमे जउन कउनो भि प्रमुख आएलापर भि वन क्षेत्रसे होएबाला काठके चोरी तस्करी नियन्त्रण होएके साटा बढइत गेल हए । कउनो वेर चार कोशे झाडीके रुपमे प्रख्यात रहल रौतहटके वनजंगल जोगाबेके साकारात्मक सोचके अभावमे दिनदिने होरहल कटान आ चोरी तस्करीके कारण रौतहटके घना वन क्षेत्र उजाड बनइत गेल हए । सामुदायिक वन होए चाहे साझेदारी वन काहेन होखो सबके हाल ओइसहि ओइसहि रहल हए ।

जंगलमे भेल बहुमूल्य काठ साल, खयर, सिसौ लगायतके विभिन्न प्रजातिके गाछीसब छान छानके कटान करके चोरी तस्करीके माध्यमसे कुछ व्यक्ति एवं कर्मचारीके स्वार्थके कारण येलनके वन क्षेत्र उजाड एवं विनाश होते गेल हए । वनजंगलके विनाश संघे येलनके स्थानीय बासिन्दासब उपर पररहल नकारात्मक असरके कारण पर्यावरणमे प्रतिकुल असर परल विज्ञसब बताबइअ ।

रंगपुर साझेदारी वन उपभोक्ता समिति आ जंगलसहिया साझेदारी वन उपभोक्ता समिति अन्तर्गतके वन क्षेत्र सहित समग्रमे रौतहटके वन क्षेत्रके अवस्था निके भयावह रहल हए । कुछ स्थानीयके अनुसार जरनाके नाममे काच सालके गाछी काटके गोलिया बनाबेके, वन भित्रे चिरान करके चिरान मिलतक पुगाके बिक्री करेके प्रवृत्ति अखुनी येलन बढल हए । “छोट छोट सालके गोलिया चिरान मिलमे लगलाकेबाद चार–पाच हजार रुपैया सजिले पाबेके आशमे चोरी तस्करी बढइत गेल स्थानीय बासिन्दा विनोद चौधरी बतएलन ” ।