बज्जिकाञ्चल संवाददाता,रौतहट,भदौ १९ गते ।
सामाजिक सञ्जालउपर सरका कएले प्रतिबन्ध सम्बन्धी निर्णयके लेके विभिन्न वर्ग–स्तरसे मिश्रित प्रतिक्रिया आएल हए । कउनाे येकराके सिस्टमसे सञ्चालनके लेद आवश्यक कदम कहले हए आ कउनाे मिडियाउपर नियन्त्रण करेके प्रयास कहईत असहमति जनएले हए ।
कटहरिया, रौतहटके गणेश मिश्रा कहलन सरकार कएले कदमके सकारात्मक रूपमे लेईत कहलन, “सिस्टमसे चलाबेला सरकार कडा निर्णय लेबेकेपरी । अखुनी अनियन्त्रित रूपमे सामाजिक सञ्जाल चलरहल हए, येसे अनुशासनमा मद्दत पुगाबेबाला हए ।”
लेकीन बगही, रौतहटके मुकेश कुमार साह फरक धारणा राखलन । हुन कहलन, “सामाजिक सञ्जाल बन्द करनाई समाधान नहए । येकर दुरुपयोग रोकेला कानून बनाबेकेपरी । ऐन ल्याके नियमन करे सकि, लेकिन सिधा बन्द करनाई निकम्मापन मात्र हए ।”
ईहेबीच इबज्जिकाञ्चल दैनिकके सम्पादक रामअधार प्रसाद यादव कहलन ई निर्णयके अभिव्यक्ति स्वतन्त्रताउपर अंकुश लगाबेके सरकारके चालल रूपमे व्याख्या कएले हए । हुन कहलन, “मिडियाउपर नियन्त्रण करेके कउनाे भि प्रयास अस्वीकार्य हए । सरकार सामाजिक सञ्जाल बन्द करके नागरिकके वाक स्वतन्त्रताके छिनेके खोजले देखलजाईअ ।”
फतुवा बिजयपुर–९ के वडाअध्यक्ष राकेश यादव कहलन कुछ हदतक समर्थन जनाबईत, विदेशी कम्पनीसबके कर दायरामे ल्याबनाई जरुरी रहल बतएलन । हुन कहलन, “फेसबुक, युट्युब जईसन कम्पनीसब येलनसे बजार प्रयोग करईअ लेकिन राजस्व न तिरईअ । ओहिसे सरकार येकराके कर प्रणालीमे ल्याबनाई निमन कदम हए । लेकिन ई बहानामे जनताके पहुच बन्द करनाई उचित नहए ।”
येने राष्ट्रसेवक कर्मचारी विवेक सहनी कहलन पूर्ण रूपमे प्रतिबन्धके पक्षमे हए । उनका अनुसार, “अनुशासन कायम करेला आ गलत प्रयोग रोकेला सामाजिक सञ्जाल बन्द हि करेकेपरी । युवापुस्ताउपर येकर नकारात्मक असर पररहल आ, ओहिसे सरकार आगारु सारल कदम ढिला भेलापर भि उचित हए ।”
येईसे रौतहटके विभिन्न वर्गसे आ–आपन दृष्टिकोण प्रस्तुत कएलापर, समर्थन आ विरोध दुनु स्वर एकसाथ सुनाए लागल हए । कुछ येकराके प्रणाली मजबुत बनाबेके अवसरके रूपमे देखरहल हए आ कुछ नागरिक अधिकारउपर हस्तक्षेपके रूपमे लेले हए । आगामी दिनमे सरकार कउनाे उपर आगारु बढईअ कहल प्रति सर्वसाधारणके चासो बढल देखलजाईअ ।

