फाका—उपवास
आज व्यथित विकल बेचैन आकाश काहे हय
साथ मे चांद भी चुप गुमसुम उदास काहे हय
फूल कली भंवरा सब मस्ती में झूम रहल है
ई फागुन के हवा नाहक में हताश काहे हय
करेजा कांप रहल हय पीपल के पत्ता लेखा
भोरे भोरे मन बोझिल बदहवास काहे हय
कभी समय मिले त तू हमरा के बता दिहा
अपना से जादे तोरा पर विश्वास काहे हय
कुरता के जेबी में भरल हय शब्द आ मुहावरा
तइयो रोज नया नया शब्द के तलाश काहे हय
बाप बेटा दुनु के रिश्ता शाश्वत आ यकीनी रहे
अब ई रिश्ता में आवे लागल खटास काहे हय
सारा सुख सुविधा संपदा अमीर के हिस्सा में ही
गरीब के भाग्य में भूख फाका उपवास काहे हय
खूब फहरा रहल हय झूठ के साथ देबे वाला
सच्चा लोग के नियति में पीड़ा संत्रास काहे हय
सुरेश वर्मा, भारत

