माई
माई के ममता के कउनाे तोल नहए,
ओकर दुआ में जइसन कवनो मोल नहए।
भूखल रहे उ, माकिर रोटी दे देईअ,
हमनीके लेल उ आपन सपना बेच देईअ।
रात में जइसे दिया, खुदे जर के इजाेतकरले ,
प्रिती में आपन सगरो जिनगी बाँट देइले।
बुखार चढ़ल होखे, तबहूं थाली परोसे,
हमरा न होखे कुछ, बस एही में रोवे।
दुनिया के रीत भुला, बस हमके सिखाबइअ,
नामसे न, नेह से हमके चलावइअ।
हम त बहक जाई, गलती पर गरियाईबइअ,
ओकर आँख से बस नीर झर जाईअ।
माई के ओछाईं त छाँह हए जइसे लागे,
सुख-दुख में माई के याद बहुते अाबे।
भोला यादव
रौतहट पेटभर्वा ०५

