खीर खाए के दिन एकटा सांस्कृतिक आ धार्मिक परंपरा वाला खास दिन हए, जे खास के’ नेपाल, भारत आ बज्जिका क्षेत्र में सावन महिनाके शुक्ल पूर्णिमा या नजदीकी दिन में मनावल जाइ अ । ई दिन लोग चाउर, दूध, चीनी आ सवाद अनुसार मेवा मिला के’ खीर बनबैत हए आ परिवार, मित्र आ पड़ोसी सभ संघे मिलके’ खाइ हए । खीर हिन्दू धर्म में पवित्र आ शुभ भोजन मानल जाइ अ ।

ई भोजन देवी(देवता सभ के प्रसाद के रूप में चढ़ावल जाइ हए । खीर खाए के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु, लक्ष्मी आ अन्न देवता के पूजा करल जाइ हए । मान्यता अछि कि एहि दिन खीर खाए से घर में समृद्धि, सुख(शांति आ अन्न के बरकत होइत अ । ए दिन सवेरा में घर के साफ(सफाई करल जाइ हए । दूध

के उबाल के ओही में चाउर डालल जाइ हए । धीमे आंच पर खीर पकावल जाइ अ ।
चीनी, काजू, किसमिस, नारियल आ इलाइची जइसन स्वादिष्ट सामग्री डलल जाइ अ । तैयार खीर भगवान के चढ़ा के सब मिलक’ खाइ छत । खीर खाए के दिन समाज में मेल(जोल के भावना जागृत कररईत हए । लोग एक दोसर के घर खीर खाए लेल बोलबैत अ , बच्चा से बूढ़ तक खुशी(खुशी खीर खाइ छत । ए दिन गांव(घर में भाईचारा, प्रेम आ सहयोग के वातावरण बनल रहै हए । खीर खाए के दिन सिर्फ एकटा परंपरा नइखे, बल्कि ई संस्कार, प्रेम आ एकता के प्रतीक हए ।

एहि दिन हम सभ अपन पारंपरिक भोजन, संस्कृति आ संबंध के मजबूती देइत हए । हम सभ के चाही जे एहन पर्व सभ के सादगी आ श्रद्धा से मनाबी, ताकि समाज में मिठास आ मेल बना रहल हए । एही शुभ भावना से निबंध समाप्त करै हए ।