बज्जिकाञ्चल संवाददाता,रौतहट,१६ गते पुस ।
बज्जिका साहित्यकार रामचन्द्र महतो कुशवाहाके एक साथ आधा दर्जन कृति प्रकाशित होरहल हए । बज्जिका भाषा आ साहित्यके सशक्त अभियन्तासमेत रहल कुशवाहाके नाटक आ खण्डकाव्य मिलाके आधा दर्जन किताब एकसाथ प्रकाशित होरहल हए ।
साहित्यकार कुशवाहाके पाँचगो नाट्यकृति आ एगो खण्डकाव्य प्रकाशनके अन्तिम तयारीमे हए । कुशवाहाके घर परिवार, पिया परदेश, कुल खन्दान, अपन समाज आ नहिराके कुत्तो प्यारा नाटक आ सरस्वती खण्डकाव्य एकसाथ प्रकाशित होरहल हए ।
नेपालीय बज्जिका साहित्यकारमे एकसाथ आधा दर्जन साहित्यिक कृति प्रकाशन करेवाला पहिल साहित्यकार कुशवाहा बनल छथिन ।
बज्जिका साहित्य समाज सर्लाहीले संस्थापक अध्यक्षसमेत रहल साहित्यकार कुशवाहा अनेको सामाजिक संघसंस्थामे सक्रिय रहल छत । साहित्यकार कुशवाहाके एसे पहिले बज्जिका साहित्य दर्पण (कविता संग्रह), बज्जिका समाज दर्शन (लेख संग्रह), सौन्दर्यमे सुगन्ध (लेख संग्रह), अपन मधेश (बालकृति), बज्जिका लघुकथा (संयुक्त) प्रकाशित होचुकल हए । एकसाथ छओगो कृति प्रकाशित होइते साहित्यकार कुशवाहा नेपालमे बज्जिका भाषामे सबसे बेसी कृति प्रकाशित करेवाला साहित्यकार भी बनजइहन ।
साहित्यकार कुशवाहा नेपाल आ भारतमे विभिन्न संघसंस्थाद्वारा पुरस्कृत आ सम्मानित होचुकल छथिन । कुशवाहाके भावशिरोमणिके उपाधि भी देलगेल हए ।
बज्जिका भाषा आ साहित्यके सेवा तथा चिन्तनमे दिनरात क्रियाशील साहित्यकार महतोके पहचान विश्वके बज्जिकासेवीमे बनचुकल हए । साहित्यकार कुशवाहाके सक्रियता अन्य साहित्यकारके लेल भी अत्यन्त प्रेरणादायी रहल हए ।


