बज्जिकाञ्चल संवाददाता,०५ गते पुस ।
उठाबे कहाँ सकल कौनो युवक सफल लौटल तेना आएल जेना होड़के विफल बैठल जाके अपना ठौर निराश उदास अन्दर क्रोध बाहर गौर व्यथित हतास सिद्धार्थ जाके सभाके बिच औंठासे एकेगो धनुख उहे उठाके तब हाथसे एकेगो माथसे उंच कैलक सोझे सिंहानू धनुख देखैत सारा रहल नव पुरानू मनुख तखने धनु उठाके आगे सजल प्रत्यंचा नजर बुरा करिया मुहे लागल तमंचा लगले एक सिद्धार्थ तब छोर्लक तीरके लगाके शुद्ध निसान अहं फोर्लक वीरके एकके बाद दोसर खेल कठिन कर्तप साहस पूर्ण वीरता पूर्ण मोस्किल अदप साराके सारा लागल करे कुँवर प्रशंसा कर्तप खेल वीरता देखी उडल आसंखा बहुत वीर साहसी हए कुँवर सिद्धार्थ युद्धके कला प्रहार छेक सबमे किमार्थ सोंचल जेना नहए रति युवक अक्षम बल आ गुण सामर्थ्य बुद्धि कुँवर सम्पन्न सातगो दिन देखके सब भेलक मोहित शिक्षित सभी दीक्षित सारा देखके मोहित लागल करे सिद्धार्थ साथे विवाह कामना अपना पुत्री बहिनी साथ लगन गवना लगाबो कौनो कतनो दाग चरित्र दामन अपने बुद्धि हटैछै सारा कलंक लांछन अपने बुद्धि विवेक चाल सुन्दर सागर निमन सारा कर्तव्य पथ सुधर आगर ।
नोटः हरेक शनिचरके अंकमे बुद्ध महाकाव्यके अंश क्रमशः प्रकाशित होईते आरहल हए ।

