भोला यादव उर्फ प्रमोद
रौतहट पेटभर्वा
मौत के सच्चाई
मौत बा सच्चाई, ना करे आवाज,
कब आ जाई, ना देल संकेत के राज।
धन-दौलत, शोहरत सब छुटजाई,
खाली कफन में शरीर लपेटाई।
का होई इ धन के मेल,
ना साथ देला रुपइया के खेल।
जवन करम करब उहे संग जाई
धन खातिर लोग जान लेता,
पड़ोसी खातिर दुआ ना देता।
अगर इंसानियत ना रही त,
का मतलब होई जिनगी के?
मौत से डरे के ना बा जरुरत,
साँचाई में जीला से बा हिम्मत।
ई दुनिया छोड़ि सब चली जाई,
बाकी नामवा अमर रह जाई।

