बज्जिका 
मिल—जुल के हसी—गाना,
सुतल सपना जगावे,
हमर बज्जिका भाषा,
सबके दिल में बसावे।

हमर माटी के सुगंध हए,
हमर बोलि के रंग हए,
बज्जिका में बात करू,
दिलवा में उमंग हए।

बज्जिकामें सबके जान हए
अपन मातृभाषा पहिचान हए
बज्जिकाके माया सबतर जग जाने
अपन धरती के सुगन्ध, दिलवा ही जाने ।

बज्जिका बोलि अमृत रस लागे,
माटी के महक, मनवा भागे।
खेतन में लहर, गावे गान,
बज्जिका भाषा, हमर पहचान॥

राजन गुप्ता, रौतहट