देश प्रेम
हमर देश के माटी, सोना जइसन चमकइत हए,
नदिया, पहाड़ आ खेत, सबके आन—बान हए।
देश के खातिर जवान, जान लड़ल हए,
माता—पिता, बाप—दाई, गर्व से सिर उठावहए।
हमर भाषा, हमर संस्कृति, सबके अमूल्य धरोहर हइ,
देश प्रेम के भावना, हरेक मन में झरनासरह हइ।
वतन के खातिर कठिनाई सहहइ, डर ककरो नै,
देश के सुख—शांति खातिर, दिल सगरो लगाल है ।
हमर झंडा लाल, अकाश में गर्व से लहरावऽ हइ,
देशभक्ति के गीत, हृदय में सदिखन गूंजाव हइ।
जंगल, खेत, नदी—ताल, सब हमर घर हइ,
देश प्रेम के बिन, जिनगी अधूरा धर हइ।
देश के सेवा, ईश्वर के सेवा जइसन हइ,
देश प्रेम के राह, जीवन के असली रथ हइ।
राजेश कुशवाहा, सर्लाही

