बज्जिकाञ्चल,०६ गते भादो ।
पूर्वीय दर्शन, संस्कृति सभ्यता एकदम ही प्राचीन, वैज्ञानिक, मानव हितकर आ हरेक दृष्टिकोणसे उत्तम हए । आधुनिक विकासके युगमे अभी शिक्षाके विकास त बहुत जोडतोड होइहल हए । लेकिन अपन संस्कार, मर्यादा, अस्तित्व,पहिचान व्यवहारिकता, सामाजिकताके साथ–साथ लाज–शरम भी समाप्त होइत देखल जारहलु हए ।
हमर सबके अपन समाजमे अभी आधुनिकता,शिक्षा,दिखावा,सोसल मिडियाके दुरुपयोगसे पश्चिमी संस्कृति–सभ्यताके प्रभाव बढैत गेलासे हमरासबके अपन संस्कृतिमे अनेकन विकृति बढ़इत गेलासे चिन्ताके विषय बनल हए ।
जेना जन्मदिनके नामपर अपना बच्चासवसे केक कटबाके सुरुसे ही बच्चाके हातमे छुरा (प्लाष्टिकके ही सही) पकराके हमसब अपना बच्चाके काटमार, हत्याहिंसामे आगे बढाबे प्रेरित कररहल छी । उ एकदम अति सुक्ष्म बात हए ।
दोसर तर्फ बच्चा सबके आपसी सद्भाव,परस्पर मेलमिलाप, एकताके भावना, घरपरिवार सबके साथे एकजुट होके रहेके चाही से भावनासे हटाकर के केक कटबइत हमसब बच्चासबके मन, मस्तिष्कमे सुरू से ही सौहार्दपूर्ण वातावरणके टुक्राबेबाला काम में तल्लीन छी और बच्चाके जीवनमें, भविष्यमे खुब उज्याला आबेके चाही से कामना करेके सटामे हम सब मैनबती जलाके बच्चारते फूँ– करइत मुझाबे बाला काम करवइत बच्चाके जीवनमें अंधेरा आबे से गलत कामना करइत एक विकृति समाजमे देखल जारहल हए ।
ताईसे जन्मदिनके दिन अपन घरपरिवार, समाज, इष्टमित, आफन्त,शुभचिन्तक, शुभेच्छुक लोगके बोलाके अपनासे श्रेष्ठ आदमीसबके हातले बच्चाके टीका (चन्दन) लगवाके आशीर्वाद लेबेके चाही । बच्चाके हातसे अपना कुलदेवता, ग्रामदेवता आ अपन श्रद्धा राखेवाला नजिकके मन्दिरमे जाके दीपक जलाबेके चाही और ओई दिन मिष्ठान लगायतके अपना सामथ्र्य आ हैसियत अनुकूल ही अनावश्यक खर्च न करइत सात्तित्वक भोजन अपना बच्चाके साथे शुकचिन्तक लोगके करवइत शुभकामना और आर्शिवाद बच्चाके देके सामान्य रूपसे जन्मोत्सव मनाबेके चाही ।
अपन परम्परागत रहनसहन, जीवनशैली, खानपान, संस्कृति, संस्कार, सभ्यता, मर्यादा, सामाजिकता, व्यवहारिकता, धर्म–कर्मके संरक्षण करेमे आ संस्कृतिके भितर बढइत विकृतिके रोकेमे हमरा सवगोटेके अपना–अपना जगहसे लगनाई बहुत ही जरुरी हए ।

