चन्दन यादव, रौतहट २० गते सावन ।

मधेश प्रदेशके किसानसब उख उत्पादनमे सरकार देले अनुदान कटौतीके विरोधमे आन्दोलन बढे लागल हए । रौतहट, सर्लाही, महोत्तरी लगायतके जिल्लाके किसान आ नेतासब सरकारके कडा सन्देश देइत अनुदान वापतके रकम तुरुन्त खातामे पठाबेला माग कएले हए । आन्दोलनके क्रममे किसानसब प्रमुख जिल्ला अधिकारीके ज्ञापन पत्र बुझएले हए आ देशभरके चिनी मिल अगाडि विरोध प्रदर्शनसब कएलगेल हए ।

अशोक यादव – अध्यक्ष, उखु उत्पादक किसान संघ, रौतहट
आइ देशैभरके चिनी मिल अगाडि किसानसब आगी बारके आक्रोश देखएले हए । इ खेलौना हए ? किसानके जीवन, ओकर पसिना, ओकर उत्पादन । पहिले हमनी प्रमुख जिल्ला अधिकारीके ज्ञापनपत्र देचुकल बारी । अब नसुनलापर भादो ८ गते माइतीघर मण्डलामे अनिश्चितकालीन धर्ना सुरु होएबाला हए । जबतक हमनीके माग पुरा नहोइ, तबतक आन्दोलन रुकेबाला नहए । कानुन किसानके मात्र लागइअ ? जब सरकार गल्ती करी, किसानके ठगी, ओइसन सरकारके जनता कारबाही नकरी । चिनी मिलमे उख लेजाके बेचलापर कथी मिलल किसान नाफा नहए, घाटा मात्र । आ सरकार मुह देखाके कहइअ — पैसा नहए । ए सरकार तु किसानके प्रलोभन देखाके ठगी कएले । अब इ आन्दोलनसे तोहराके भि सुधादी ।

राज कुमार दास, नेता ः जनता समाजवादी पार्टी
जनता समाजवादी पार्टीके नेता राज कुमार दास नेपाल सरकारके चेतावनी देइत कहलन, “कानमे तेल राखके नबैठु, किसानके लोर नझारु । मधेश खडेरीके चपेटामे परल हए, मल, पानी, बीया कुछो नपएले हए ।” हुन सरकारसंघे रौतहट लगायत सम्पूर्ण मधेशके किसानके खडेरी राहतस्वरूप प्रति कठ्ठा कम्तीमे सय रुपैयाके दरसे राहत देबेला माग कएलन ।

रामभरोस यादव – नेता ः एकीकृत समाजवादी पार्टी नेपाल
रौतहट, सर्लाही, महोत्तरीके १७ जना किसान करेन्ट लागके ज्यान गुमाबइअ, आ उसब चुपचाप बैठल हए । किसान मरला पर भि उसबके कान नखुलइअ । हमनीके किसान आइ नाफा नभेलापर भि उख लगाबइअ, लेकिन ओकनीसब ७० रुपैया देबेके कहके, अब आके ३५ रुपैया मात्र देबेके दुस्साहस कएले हए । इ किसान उपरके धोका हए, लुट हए, बेइमानी हए । हमनी प्रमुख जिल्ला अधिकारीके ज्ञापनपत्र देचुकल बारी , लेकिन सुनु — अगर तुरुन्त किसानके खातामे अनुदान नआइ त, अब किसानसब गाओ गाओसे उठेबाला हए । आन्दोलन क्रमबद्ध होएबाला हए, सडक गरम होएबाला हए, आ उ आवाजके रोकेबाला नहए । हमनी अब चुप नरहम, जबतक किसान न्याय नपाइ, तबतक आन्दोलन रत्तिभर भि नरुकी ।

कुमार चौलागाई – नेता ः नेपाली कांग्रेस
हमनी किसानके पक्षमे डेलीगेशन लेके काठमाडौ जाएम, लेकिन उसबकेहि मन्त्री हमनीके बिक्रि करइअ । एकजना उधोग मन्त्रालयमे बेचइअ, दोसर सिंहदरबारके गेटसे निकालइअ । येइसन धोका कहियातक ? किसान उख उत्पादन करइअ, पसिना बगाबइअ, ” आ सरकार कहइअ — “पैसा नहए ।” इ कथी हए ? किसानके उख बेचेबाला बेर आबइअ, लेकिन पैसा तिरेबाला बेर सरकार चुप लागइअ । नेता होके कुर्सीमे बैठेके लेकिन किसानके लेल एक शब्द नबोली । इहे कारणसे आइ किसान पछाडि परल हए । अब किसान चुप लागेबाला हए । सरकारके खबरदार कएलजाइअ — इ बेर आन्दोलन चिनी मिलमे मात्र नहए, सिंहदरबारतक पुगेबाला हए ।

बैजु प्रसाद बाबरा – सञ्चालक, बाबा बैजुनाथ सुगर एण्ड केमिकल
पहिले किसानके ७० रुपैया देइत रहे, अखुनी बजेटमेहि शून्य करदेल हए । इ जनताके धोका हए । फेनु मन्त्रीसब बैठक बैठके ३५ रुपैया देबेके निर्णय करइअ — इ किसानके अपमान हए । इ अवस्थामे चिनी मिल भि घाटामे गेल, बन्द होएके स्थितिमे पुगेबाला हए । अब त बेरोजगारी बढी, किसान रोइ, उद्योगी टाट पल्टेबाला समस्या आगेल हए । हमनी किसानके पक्षमे बारी, लेकिन उ सरकार किसानके जेतना समस्या पारले हए, उ लाजमर्दो हए । अगर अनुदान किसानके देबेकेहि परी त, ओकरा लेल मिल उद्योगीसब भि तयार हए । लेकिन सरकार नसुनलापर अब आन्दोलन मिलसे न, सिंहदरबारसे सुरु होएबाला हए ।

सरकार मधेशके किसानके आवाज नसुनलापर वर्तमान परिस्थितिमे कृषक आन्दोलनके लहर तीव्र होए सकेबाला हए । इ समस्या केवल कृषि मात्र नहए, सामाजिक आ आर्थिक असन्तुलनके सूचक भि हए । समयमेहि समाधान नकएलन कृषि क्षेत्र, उद्योग आ रोजगार तीनु संकटमे परेके खतरा हए ।